भारत विविध जलवायु, भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों वाला देश है। यहाँ हिमालय की ऊँची चोटियों से लेकर दक्षिण के तटीय इलाकों तक, हर क्षेत्र का मौसम अलग-अलग स्वरूप दिखाता है। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) देश के लिए एक सटीक और विश्वसनीय मौसम प्रहरी की भूमिका निभाता है। यह न केवल मौसम की भविष्यवाणी करता है, बल्कि लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए समय पर चेतावनी भी जारी करता है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का परिचय
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एक प्रमुख वैज्ञानिक संगठन है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह विभाग मौसम की निगरानी, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन, और प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मौसम का सीधा असर आम लोगों की ज़िंदगी पर पड़ता है। इसलिए, सटीक और समय पर मौसम की जानकारी किसानों, यात्रियों, मछुआरों और आम नागरिकों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का इतिहास
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की स्थापना 1875 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुई थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री और कृषि कार्यों के लिए मौसम से जुड़ी जानकारी प्रदान करना था। स्वतंत्रता के बाद विभाग का दायरा बढ़ाया गया और इसे आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया गया।
1950 के दशक में विभाग ने Doppler Weather Radar, उपग्रह तकनीक, और स्वचालित मौसम केंद्र (Automatic Weather Stations) जैसे आधुनिक उपकरणों को अपनाया। इसके बाद से IMD ने मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार किया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख कार्य
IMD के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- मौसम पूर्वानुमान जारी करना – दैनिक, साप्ताहिक और मौसमी पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं।
- प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी – चक्रवात, बाढ़, ओलावृष्टि और गर्मी की लहरों से पहले चेतावनी देना।
- जलवायु डेटा संग्रह और विश्लेषण – देशभर के मौसम केंद्रों से डेटा एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करना।
- वैज्ञानिक अनुसंधान – जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अध्ययन पर अनुसंधान करना।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग – विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अन्य देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना।
मौसम पूर्वानुमान कैसे तैयार किया जाता है?
मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत वैज्ञानिक और जटिल होती है। इसमें कई चरण शामिल होते हैं:
- डेटा संग्रहण: पूरे देश में फैले हजारों स्वचालित मौसम केंद्र, रेडार स्टेशन और उपग्रह लगातार तापमान, आर्द्रता, हवा की दिशा, और दबाव जैसी सूचनाएँ रिकॉर्ड करते हैं।
- कंप्यूटर मॉडलिंग: एकत्र किए गए डेटा को सुपरकंप्यूटर में चलाए जाने वाले गणितीय मॉडलों में डाला जाता है, जो भविष्य के मौसम की भविष्यवाणी करते हैं।
- विश्लेषण और सत्यापन: मौसम वैज्ञानिक इन मॉडलों के परिणामों का विश्लेषण करते हैं और वास्तविक परिस्थितियों से तुलना कर सबसे सटीक पूर्वानुमान चुनते हैं।
- सूचना प्रसारण: अंततः, ये पूर्वानुमान समाचार माध्यमों, मोबाइल ऐप्स, और वेबसाइट के ज़रिए लोगों तक पहुँचाए जाते हैं।
उपग्रह और रडार की भूमिका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पास आधुनिक Doppler Weather Radar Systems और INSAT श्रृंखला के मौसम उपग्रह हैं, जो भारत के ऊपर के वायुमंडल की लगातार निगरानी करते हैं।
- Doppler Radar तूफ़ान, वर्षा, बिजली और हवा की गति का पता लगाने में मदद करता है।
- INSAT और Megha-Tropiques जैसे उपग्रह तापमान, बादल और नमी की स्थिति को रियल-टाइम में मॉनिटर करते हैं।
इन आधुनिक तकनीकों की मदद से IMD मौसम की स्थिति का सटीक पूर्वानुमान करने में सक्षम हुआ है, जिससे लाखों लोगों की जानें बचाई जा चुकी हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की सेवाएँ

IMD नागरिकों, सरकार और उद्योगों के लिए कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है:
- कृषि मौसम सेवा (Agromet Advisory Services): किसानों को फसल प्रबंधन के लिए सटीक मौसम जानकारी।
- विमानन मौसम सेवा (Aviation Weather): एयरलाइंस और हवाई अड्डों के लिए मौसम बुलेटिन।
- समुद्री चेतावनी प्रणाली (Marine Forecast): मछुआरों और नौसेना के लिए समुद्री स्थिति की जानकारी।
- आपदा चेतावनी प्रणाली: चक्रवात, लू और बाढ़ से पहले चेतावनी जारी करना।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ
- सटीक चक्रवात पूर्वानुमान: 2019 में आए चक्रवात “फानी” की चेतावनी समय रहते जारी कर विभाग ने हजारों जानें बचाईं।
- कृषि क्षेत्र में योगदान: फसल आधारित मौसम पूर्वानुमान ने किसानों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि की।
- उच्च तकनीक अपनाना: सुपरकंप्यूटर “मिहिर” और “प्रत्युष” की मदद से IMD की सटीकता में वृद्धि हुई।
- जलवायु रिपोर्टिंग: हर वर्ष “India Climate Summary” जारी किया जाता है, जिसमें देशभर के तापमान और वर्षा के रुझानों का विश्लेषण होता है।
जलवायु परिवर्तन और IMD की भूमिका
जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग देश में बदलते तापमान, वर्षा पैटर्न और चरम मौसम घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करता है। IMD के वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में भारत में औसत तापमान में वृद्धि हुई है और गर्मी की लहरों की आवृत्ति बढ़ी है।
IMD इन आंकड़ों के आधार पर सरकार को नीतिगत सुझाव देता है ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का सक्रिय सदस्य है। इसके अलावा, यह जापान मौसम विज्ञान एजेंसी, यूएस नेशनल वेदर सर्विस, और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर अनुसंधान और डेटा साझा करता है। इस सहयोग से भारत में मौसम पूर्वानुमान तकनीक लगातार सुदृढ़ हो रही है।
नागरिकों के लिए उपयोगी प्लेटफ़ॉर्म
IMD ने डिजिटल तकनीक के युग में जनता की सुविधा के लिए कई ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शुरू किए हैं:
- IMD Mobile App: “Mausam” और “Meghdoot” ऐप्स के ज़रिए हर व्यक्ति अपने क्षेत्र का मौसम जान सकता है।
- IMD Official Website (https://mausam.imd.gov.in): यहां से आप वास्तविक समय का मौसम पूर्वानुमान, रडार इमेज और अलर्ट देख सकते हैं।
- सोशल मीडिया: ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से भी चेतावनियाँ जारी की जाती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर: इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
प्रश्न 2: IMD की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: वर्ष 1875 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान।
प्रश्न 3: क्या IMD किसानों के लिए सेवाएँ प्रदान करता है?
उत्तर: हाँ, IMD “कृषि मौसम सेवा” के माध्यम से किसानों को फसल प्रबंधन के लिए सलाह देता है।
प्रश्न 4: Doppler Radar क्या होता है?
उत्तर: यह एक आधुनिक यंत्र है जो बारिश, तूफान और हवा की दिशा व गति का पता लगाता है।
प्रश्न 5: क्या IMD जलवायु परिवर्तन पर रिपोर्ट जारी करता है?
उत्तर: हाँ, हर वर्ष “India Climate Summary” रिपोर्ट जारी की जाती है।
प्रश्न 6: क्या IMD के मोबाइल ऐप से मुफ्त में जानकारी मिलती है?
उत्तर: हाँ, Mausam और Meghdoot ऐप पूरी तरह निःशुल्क हैं।
निष्कर्ष
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भारत की वैज्ञानिक प्रगति का एक जीवंत उदाहरण है। यह विभाग केवल मौसम की भविष्यवाणी नहीं करता, बल्कि देश की सुरक्षा, कृषि, अर्थव्यवस्था और जलवायु नीति में भी अहम भूमिका निभाता है।
तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग के दम पर IMD आज दुनिया के सबसे विश्वसनीय मौसम विभागों में से एक है। आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से इसकी सटीकता और भी बढ़ने की संभावना है।
संदर्भ लिंक:
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट
![भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD): मौसम पूर्वानुमान, चेतावनी प्रणाली और जलवायु रिपोर्ट 2026 [पूर्ण जानकारी]](https://marathibanna.com/wp-content/uploads/2026/01/भारतीय-मौसम-विज्ञान-विभाग-IMD-872x547.webp)



